ये जरूरी नही मगर…Ye Jaroori Nahi Magar…

Lot of events occur in life where the end result is predictable…But not always…

ये जरूरी नही मगर…

आह को चाहिए ता उम्र होने असर, ये जरूरी मगर,
ऐ ग़ालिब, हर आह करे मुक्कमल असर, ये जरूरी नही मगर

आग़ोश ए सहर में निखरे क़मर, ये जरूरी मगर
शब ए रोज़ शमा करे दरखशां असर, ये जरूरी नही मगर

खंजर करते है जख़्म अकसर, ये जरूरी मगर,
हर ज़हर का ज़ालीम हो असर, ये जरूरी नहीं मगर

ज़फर होती यूँ मुकम्मल गुजर, ये जरूरी मगर,
हर अख़बार ए ख़बर हो ज़बर, ये जरूरी नहीं मगर

दुनिया ए नज़र ना हो बेखबर,ये जरूरी मगर,
बे इरादा होंगी मेरी बेदार नज़र, ये जरूरी नही मगर

दर ओ दर ख्वाब हो मयस्सर, ये जरूरी मगर,
हर सिकंदर बने बादशाह ए अकबर ये जरूरी नही मगर

मंझर में हो तेरी सांसों का अतर, ये जरूरी मगर,
तेरी यादों से दीदा ए तर बन जाये समंदर, ये जरूरी नही मगर

हर डगर की आख़िर हो बसर, ये जरूरी मगर,
हर अंजाम ए सफ़र हो तेरे ही शहर, ये जरूरी नहीं मगर

डॅा नम्रता कुलकर्णी
बेंगलुरु
०९/०१/१६

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