खोखले रिश्ते…Khokhale Rishte…

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कटी पतंग…Kati Patang…

Life is full of negativity most of the times, it surrounds us in all forms, but still life has to be lived to the best of your ability because god wants you to…Life is a god gift…Live life…

कटी पतंग…

फ़िजा गुमसुम, हवाओं में ना कोई उमंग है, आसमानों में गुमशुदा ये इक कटी पतंग है

चाँद है अकेला शब में सियाह चादर ओढ़े, ये शमा बुझे तो कौन इस परवाने के संग है

लहरें भी साहिल से मिलकर थम गई जैसे, दरिया में ना कोई मौज है, ना कोई तरंग है

तस्सवूर में जो बनायी, गुम हुई वो तसवीर, दिखे खाली चौखट, बिखर गये सारे रंग है

बादलों से झाँकें चाँदनी, जुगनुओं की रक़्स, जिंदगी में ये सुहाने अदना पल मिलते चंद है

ये रूह जब छोड़ जाये इस बेहिस बदन को, कज़ा भी छुने से कतराये, ऐसा हुआ ये अंग है

बिखरे ख़यालात, टूटे जज़्बात,कई सवालात, जखमी घायल रूहों से भरा मैदान ए जंग है

सुनसान राहों पे काफ़िले निकले जनाज़ों के, उठ खड़ी हुयी ये काया जिसे जीना रज़ामंद है

जिंदगी घिरी अंधेरों में, रोशनी भी बेहोश है, गो कोशिश करूँ जीने की, ये खुदा ए पसंद है

डॅा नम्रता कुलकर्णी बेंगलुरु ०९/०१/१७

उसे भूला देना…Use Bhula Dena…

उसे भूला देना…

गुजरे वक़्त को रुखसत करना, उसे भूला देना
ग़म ए जहाँ को ना थामे रखना, उसे भूला देना

ख़ुदा को पैहम याद करना, ना उसे भूला देना,
दुश्मन को जरूर दुआ देना,ना उसे भूला देना

जलती यूँ मिरी क़ामयाबी पर बेरुखी ये दुनिया,
जुल्मों सितम करे संग दिल जमाना, उसे भूला देना

सहरा की गर्म रेत सी रूह, प्यासी चंद बूँदों की,
हो सके तो बरसना, ना तरसाना, उसे भूला देना

इन्सानी फ़ितरतों ने लिखा सफहों पर फ़साना,
माजी मुड़े पन्नों को मुड़े रखना, उसे भूला देना

कोई ना किसी का, मशगूल यहाँ सारा जहाँ,
आँसू आँखों में यूँ असीर करना, उसे भूला देना

इस रहगुज़र पर चलना आसान नही प्यारे,
दिखे नक्श ए पा का निशाना, उसे भूला देना

साकिया जब चल पड़ें कदम मदीने की ओर,
मैक़दा जाने इरादा ना करना, उसे भूला देना

जनाजा जो निकला, गोर पे कफ़न चढ़ा देना,
मुर्दा ए ग़म को वहाँ दफ़नाना, उसे भूला देना

डॅा नम्रता कुलकर्णी
बेंगलुरु
१८/१२/१६

यादें…Yaadein…

In memory of the 32nd year grand get together at goa and the millions of fantabulous memories carried forward from it…Dedicated to all my batchmates…Hangover…Cheers🍾🍷🍸🍹🍺🍻🥂🥃

मिले हम जब गोआ में दोस्तों…Goa GT was like the mehfil of Saaqi…

यादें

मिले साक़ी तेरी बज़्म में कुछ हर्फे याद आये,
पलटे पुराने सफहों को, जिंदगी के फ़लसफ़े याद आये

दोस्तों के साथ ना कोई पैमाने तेरे मैक़दे साक़ी,
किसी ने सुनाये पुराने किस्से, तो यूँ शगूफे याद आये

शब ओ सहर चला ये सिलसिला रक़ाबतों का,
उन यादों के कारवाँओं में मुझे कुछ लतीफ़े याद आये

चाँदनी चुनर ओढ़े,आयी नशीली अरुस ए श्याम,
महफ़िल में दीये जो किसी ने, वो तोहफ़े याद आये

वस्ल ए यारों की रात धीरे से बसर होती रही,
जाँ असीर लफ़्ज़ यादों की स्याही में, वो सफ़हे याद आये

फिराक़ ओ जुदाई लायी फक़त मायूसी हौले से,
हबीब ओ रक़ीबों ने किये कई अल्ताफ़ ये याद आये

साग़र, साक़ी, मयनोशी, दोस्त ओ बादानोशी,
मदहोशी के लम्हे जो पी लिये, कितने दफ़े याद आये

डॉ नम्रता कुलकर्णी
बेंगलूरु
१६/०९/१७

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