कायापालट… Kayapalat…

End of another year…Getting rid of accumulated negativity and treading new paths in search of positivity…

Wishing you all a happy new year…May all your aspirations and wishes get fulfilled 🙏🙏🙏

Also praying for a friend fighting for his life…🙏🙏🙏

कायापालट…

वर्षा अखेर,आठवणींच्या गदारोळात मी,
एकला चाललो बांधून त्यासी डोईवर गाठोड्यात मी।

विखुरलेल्या भावना, जशा त्या चांदण्या,
एकटाच तिमिरात निशाचर, त्यांना वेचीत मी।

शरण आलो साक़ी मैखान्यात तुझ्या या,
जिथे साग़रात मद्य, मद्यात नशा, नशेत मी।

दे मज आश्रय आज ह्या एकच रातीला,
होता भोर मग जाईन मिहीरा संगे परत मी।

अरुणोदया संगे शोधीन नव दिशा, अनोख्या वाटा,
शृंगारलेल्या किरणालंकृत सुर्योदयात मी।

फाडून सगळे जुने प्राक्तन्नांचे नकाशे विखुरले,
पाऊल खुणांनी जन्मलेल्या पायवाटेवर चाललो धुंदीत मी।

डॉ नम्रता कुलकर्णी
बेंगलुरु
३१/१२/१७

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ऐ ग़ालिब…Aye Ghalib…

My tribute to one of the great poets in urdu on his birth anniversary…🍃🍂🌾🍁☘ ऐ ग़ालिब, तेरे कद ए सुख़न के तो नही बराबर,
गो ज़ुर्रत करती लिखने की, हूँ इक नाचीज़ शायर

तू गया अफ़साने जिंदगानी के ऐसे लिख कर,
मैं तो बन ना पाऊँ याँ तेरे जैसी शायर सुख़नवर

एक दिन मुक्कमल हो जायेगा मेरा ये सफ़र,
जब कहेंगे लोग मुझे, है ये ग़ालिबन शायर जफ़र

‘हया’ से लिखूँ इश्क़ के फसाने तेरे ज़मीन पर,
कोशिश करती हूँ कुछ तेरे अ’शआरों को समझकर

डॉ नम्रता ‘हया’ कुलकर्णी
बेंगलुरू १२/०५/१७

देखा जो मैंने तुझे…Dekha Jo Maine Tujhe…

Romantic reminiscences…Enjoy…

देखा जो मैंने तुझे…

देखा जो मैंने तुझे, गुमशुदा रह गया,
बिखरे पुराने खयालों को समेटता रह गया

नक़ाब ए चिलमन उठ गया हवाओं से,
देखा जो तेरा शबाब, तो मैं देखता रह गया

शुमार ए नफ़स भी यूँ बेशुमार हो गये,
गुल ए शबनम में तेरा अक्स ढूंढता रह गया

पलकों में बंधे अश्कों से धुंधलाई नज़र,
पीछे मुड़कर इन आँसूओं को बहाता रह गया

यादें है शब ए हिज्र की जब छोड़ गये थे,
उन सहमे कदमों की चाप मैं सुनता रह गया

याद फिर आयें, सुकूत-ए-शब-ए-तन्हाई,
मेरा वजूद फिर फ़िजाओं में बिखरता रह गया

डॅा नम्रता कुलकर्णी

बेंगलुरु
२४/०३/१७

Image used is with sole purpose of depicting the emotions of the poetry, no copyright infringement intended.

तो शायद…To Shayad…

Ifs and buts…Life is full of them…No excuses… Accept and move forward…Enjoy…

तो शायद…

ये जिंदगी ना गुजरती ऐसे तनहा,
गर हम यूँ मुख़्तलिफ़ ना होते, तो शायद…

मसरूफियत में मिली तनहाई,
मिलते कुछ लम्हे हयात ए मुख़्तसर में, तो शायद…

भरोसा किये हातों की लकीरों पर,
तवक्कुल ही गर नहीं करते, तो शायद…

आसमान भी तरसे ज़मीन से मिलने,
ना हो उफ़क़ की फ़रेबी दीवारें, तो शायद…

असीरान ए समंदर है ये कश्तियाँ,
ना हो साहिल, दरिया का दरबान, तो शायद…

गो कितने सितम ढ़ाले जमाने ने,
बहते बेइंतेहा अश्क, ना हो पलकें, तो शायद…

नक़ाबो में छिपे मिरे आँसू दिखते,
बाद ए सबा में चिलमन लहराते, तो शायद…

बिखर देते जज़्बातों की तसबीह,
ना होते गर तुम हमारे ख़ुदा, तो शायद…

महसूस होती मेरे दिल की रूदन,
कफ़न से ना ढ़ांकते इस बदन को, तो शायद…

डॅा नम्रता कुलकर्णी
बेंगलुरु
१७/०३/१७

इक शब …इक मुलाक़ात…Ik Shab…Ik Mulakaat…

इक शब …इक मुलाक़ात…

गुज़र रहे थे माह ओ साल जिंदगी के क़रीब से,

क्या लिखा सफहों पर पूछूँ मेरे मुक़द्दर ए कातिब से

मिले किस्मत से इक शब, जो गुजरी अजीब से,

सामने बैठे थे वो, करते बातें रब्त की करीब से

वो सिलसिला जो था ही नहीं, गो भुलाते कैसे,

पुरानी हसरतें मुद्दतों बाद सामने खड़ी थीं नसीब से

देखे उनको एक जमाना गुजर गया था जैसे,

रिश्ता कैसा ये, लगने लगे रकीब भी हबीब से,

नग़्मों के साग़र ए ज़ाम का नशा चढ़ा ऐसे,

भूला ना पाये वस्ल ए यार ए शब,जो थी अजीब से

डॅा नम्रता कुलकर्णी

बेंगलुरु

१५/०३/१७

Picture depicted only for purpose of expression of emotions, no copyright intended.

In Your Dreams…

In your dreams…

Though far away n lost I may seem,
Y’ll find me in the world of your dreams.

Like the waves floating on the stream,
Riding the serene rivulets of the moonbeam.

Shining in the sky of hope n’ gleam,
Amongst the dazzling rays of the sunbeam.

The touch of my warm breath’s steam,
Caressing your cheek like soft winter cream.

Lingering fragrances they may seem,
Will fill your heart till it bursts at it’s seams.

Walking on the rainbow searching for me,
Your twinkling guiding star in God’s scheme.

Our love’s surely like a fairy-tale theme,
Bubbling with emotions filled to the brim.

Though it may seem to you like a daydream,
I’ll always be somewhere within your dreams.

Dr Namrata Kulkarni
Bangalore
21/03/17

दे दो साहिब…De Do Saahib…

दे दो साहिब…

मिरे वजूद की निशानी दे दो साहिब,
हर सिम्त अब्र सियाही, ताबानी दे दो साहिब

उम्र की दहलीज़ पर हुए है दाना,
फ़िर मुझे बचपन की वो नादानी दे दो साहिब

जिंदगी में है पशेमानी ओ वीरानी,
लुत्फ़ उठता चलूँ, मुझे जिंदगानी दे दो साहिब

ना दिखे मिरे इश्क़ की नातवानी,
मुझे मिरी मोहब्बत की दरबानी दे दो साहिब

प्यार में याँ लगती दिल पे निशानी,
मिरे ज़ीगर की मुझे निग़हबानी दे दो साहिब

तुम करो बस इतनी सी मेहरबानी,
समेटकर खुशी, हमें बेपरेशानी दे दो साहिब

बिखरी दूरतक जो निले आसमानी,
ऐ चाँद, तुम्हारी सुहानी चाँदनी दे दो साहिब

डॅा नम्रता कुलकर्णी
बेंगलुरु
१४/०३/१७

रंग प्रेमाचे…Rang Premache…

थोडासा रूमानी हो जाये …

रंग प्रेमाचे…

तुझ्या रंगात रंगले मी,
नात्यात ह्या गुंतले मी।
भरले प्रीतीचे रंग तुझे,
माझ्या श्वेत तसबीरीत मी।

मेंदीच्या पानांनी रंगली,
हातावर लाली ही सजली।
करी मंजुळ नाद मनगटी,
हिरवा चुडा भरलेला मी।

विड्याचे पान गालात,
ओठावर उमले गुलाली।
काळ्या भोर मेघ केशातून,
चांदणी फुले माळीली मी।

बकुळीहार निळकंठी,
डोले पलशाची कर्णफूली।
रंगात रंगवूनी मज तू,
रंगून झाली पितांबरी मी।

श्वेतांबरी मी होती कधी,
सप्तरंगी इंद्रधनु झाले मी।
तुझ्या प्रेम रंगात रंगूनी,
रंग उधळीत गेले मी,
मलाच विसरूनी गेले मी।

डॅा नम्रता कुलकर्णी
बेंगलुरु
१३/०३/१७

Disclaimer: the picture used is one of Raja Ravi Verma paintings, solely for the purpose of depicting the emotions. No copy right intended.