ऐ नादान…Aye Nadaan…

ऐ नादान…

क़िताबें पढ़कर ना बन पाये शेख़, ऐ नादान,    
पहले अपने दिल को पढ़कर देख, ऐ नादान

जाता है दैरो हरम में, बेजुबान बूतखानो में,
खुद के जहन में झाँक कर तो देख, ऐ नादान

ज़माने के मलालों से तू लड़ने जाता है क्यों,
अंदर के शैतान को राख़ कर देख, ऐ नादान

दुनिया इक फ़रेब है, ना जता मोहब्बत यहाँ,
दीवारों भीतर इख़लाक़ रख कर देख, ऐ नादान

“हया” से बढ़कर ना है कोई सीख, ऐ नादान
ख़ुद को तो बदल कर तू ज़रा देख, ऐ नादान

डॉ नम्रता कुलकर्णी
बेंगलूरु

३१/०५/१७

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