कभी दैर ओ हरम में ,तो कभी मैखाने में …Kabhi Dair O Haram Main, To Kabhi Maikhane Main…

 

This is a world of duality.

हर एक चीज़ को समझने, जानने के लिये उसकी विपरीत बाजू बयाँ की जाती है।
ख़ुशी जानने के लिये ग़म, होश जानने के लिये मदहोशी। यहाँ तक की, देर ओ हरम पाक,ie clean
तो मैखाना नापाक ie unclean हो जाता है।

पर कुछ लोग हर हालातो में, एक ही भावना से भावित हो कर जीते चले जाते है। वो है इश्क़, प्यार, महोब्बत की भावना। उनका पेशा ही बन जाता है इश्क़ की दास्तान लिखना।

वो जान चूके है, की इसी भावना को प्रस्थापित करने के उद्देश्य से कायनात ने उन्हें इस धरातल पर भेजा है।

कायनात ने मोहब्बत की भावना को उच्चतम दर्जा दिया है, पर कुछ ही लोग इसे समझ पाते है।

उसकी भावना और उस शख्स का न कोई कोई मजहब है ना दिन ओ धरम। वो अपनी धुन में, प्रेम की वीणा पर, मोहब्बत के सुर बांध कर, हर हालत में अपनी नायाब भावना में जीते चला जाता है।

कोई उसे जीसस के नाम से, कोई मोसेस के नाम से, कोई मोहम्मद के नाम से, कोई मीरा के नाम से, जानता है, और वो अमर हो जाता है।

kabhi-dairo-haram-main-to-kabhi-maikhane-main

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7 thoughts on “कभी दैर ओ हरम में ,तो कभी मैखाने में …Kabhi Dair O Haram Main, To Kabhi Maikhane Main…

  1. prashant walzade

    tumache shabd mala samjat nahi!
    kahi asatat awaghad kahi asatat avajad !
    ji pelata yet nahi!
    tumachya lekhnine ji khali utartat akashatun !
    ti zelata yet nahi!

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  2. prashant walzade

    hi!!
    myself prashant walzade i am leaves in nashik! i am fan of your poems ! this was very joyful for me ! i am written one novel in marathi this name is prem assatt!
    this is very tremendous like your poems and its importance is this story base on medical college with murder mystery, horror, romance and sacrifice love story can i send to you this copy of the book!

    Like

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