कडवाहट…Kadawahat…

नीम तो कडवा है अपनी असली फ़ितरत से,
करेला छोड़े न ये कडवाहट अपनी ज़ात से,
पर चारागर कहते दोनो ही है बड़े काम से।

जुबान बड़ी खुदगर्ज जनम से ही आदतों से,
चले मिठी छुरी जब खेले किसी के ज़हन से,
कभी बोले मिठी, कभी कडवी अपने रवैये से।

करेला नीम न बदल पायें अपने इस सुलूक से,
खुदा ने बख़्श दिया जुबान को ऐसी बरक़त से,
गर कहें कडवे बोल तो तौबा भी कहें उसी से।

जुबान से निकली कडवाहट रही लौट आने से,
कोशिश करो मिठे शब्द ही निकले जुबान से,
गलती से चले छुरी गर, मांग लो माफी दिल से।

डॅा नम्रता कुलकर्णी
बेंगलुरु
२२/११/१६

Current Affairs…

Current affairs…

Water water every where, not a drop to drink,
Money money every where, brought a nation on its brink.

Black money, white money, terrorism galore,
All a common man wants is roti- kapda-makan once more.

Politicians come and go, governments always boast,
Caught in the mediocrity of life, the common man suffers most.

I am a common man, I am worried about my family,
What the hawala-satta-jehadi’s do isn’t it the gov’ts responsibility?

Let me live in peace, provide me with basic amenities,
I pay my taxes honestly, why should I suffer these atrocities ?

Dr Namrata Kulkarni
Bengaluru
12/11/16