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emotions in poetry…

Hi…

Welcome to my blog which is all about emotions in poetry…my emotions in my poetry…And your emotions too, as I realised from some of the readers comments…🤗

I have attempted to put my emotions in Hindi…Urdu…Marathi… English…

There are different kinds of poetry from short and sweet charolis to poems…kavitas and gazals…Nazm…

Enjoy them all…

I would also like to thank all my readers for the encouraging comments and likes🙏🙏🙏

Dr Namrata Kulkarni

चुकले…!!! Chukale…!!!

चुकले…!!!

देहभान विसरुनी, सर्वस्व अर्पण करूनी,
निरपराधी ह्या मनासी तोडूनी अन मोडूनी

शब्दांच्या मन वादळाशी सामना करी दामिनी,
मौनाची मुकबधीर छत्री चुकले माझे धरुनी

धुंद वाऱ्याने कवेत घेतले लपेटूनी,
मनाची किवाडं माझ्या चुकले बंद करूनी

किरणांची उबदार चादर अंगी सारूनी,
नैराश्याच्या सावलीत चुकले भिऊन लपूनी

पापण्यांसी ह्या टपोऱ्या थेंबानी ओलावूनी,
मखमली स्मृती सरींनी चुकले चिंब न्हाऊनी

क्षितिजावर प्रणयधनूचे सप्तरंग उधळूनी,
मनी धवल श्वेतांबरी मी चुकले रंगी रंगूनी

सागरी ह्या मन-किनारी स्मृती-खुणा कोरूनी,
अलवार आठवणींच्या लाटांना त्या स्पर्शूनी

शिंपडूनी गेला चंद्र नक्षत्रे मज अंगणी,
ओंजळी वेचून मोती चुकले चांदणं सांडूनी

दशदिशासी जळणारे अंगारे हे विखरूनी,
सत्याच्या ह्या विस्तवाशी चुकले खेळूनी जळूनी

जीव लावीला प्रीती्चया ह्या सुहास्य वदनी,
रिक्त राहिली ही झोळी,
चुकले जीव लावूनी

NK
०१/०१/१९

लिखूँ तो सही…Likhun To Sahi…

लिखूँ तो सही…

इन हाथों से जुर्म का हिसाब लिखूँ तो सही,
मेरी आहो फुगान की किताब लिखूँ तो सही

मिले जो इल्जामात ओ तोहमतें ओ शिकायतें,
क़ासिद के जाते जाते जवाब लिखूँ तो सही

किया हो जुर्म गर, हमें सज़ा भी तो मिलेगी,
सर ए दार से पहले, शिताब लिखूँ तो सही

रोक सको तो रोक लो दरिया ए झज़्बे को,
जुर्म की कुबूलियत ये बेहिसाब लिखूँ तो सही

लोग कहते गये हमे खराबों के बाशिंदे,
बज़्म ए तरब का मेरे इज़्तिराब, लिखूँ तो सही

लबों को चुप कर बैठे तेरी इस महफ़िल में,
न हो कलाम फिर भी जनाब लिखूँ तो सही

ए ग़ालिब न होगा तेरे जैसा कोई सुख़नवर,
पर्दानशीं हूँ, उठाकर नक़ाब, लिखूँ तो सही

‘हया’ की कलम से तक़दीर के सफहों पर,
क़िताब ए हयात में सवाब लिखूँ तो सही

डॉ नम्रता कुलकर्णी
बेंगलुरु
०२/०१/१९

आह ओ फुगां sighing and crying
क़ासिद postman, messenger
सर ए दार gallows
शिताब quickly
ख़राबों के बाशिंदे bad people
बज़्म ए तरब gathering of happiness
इज़्तिराब restlessness
क़लाम conversation
सुख़नवर poet
सफ़हे pages
सवाब good luck

See the video of the gazal narrative on this YouTube link

भ्रमर भ्रमंती… Bhramar Bhramanti…

भ्रमर भ्रमंती…

बंदिस्त सुमना रे हा गंध तुझा,
मज स्वच्छंद भ्रमरासी अती भावतो।

शिंपडून आसमंतात ह्या परागकण,
बघ तरी कसा मी चिंब नाहतो।

सांज उन्हाला अलवार घेऊनी कवेत,
थंड रातलहरींना पंखांनी पांघरतो।

तृणांकुरित दवात,प्रतिबिंब दिसता,
मंद झुळुकेत पंख पसरूनी उडतो।

कधी या पुष्पावर, त्या कुसुमावर गुंजन करुनी,
सरल्या आठवणीं संगे पारंब्यांवर झुलतो।

स्मृतींच्या फुलपाखरा सम तरुवेली संगे,
नाजूक कळ्यांना हळूच अलगद बिलगतो।

मधूप,पुष्प मंजरी चा अमृत रस पिऊनी,
फुलां फुलांमधे मदमस्त बागडतो।

एक एक पाकळ्या मग गळतांना रे,
माझेच अश्रू पंखांनी पुसून सावरतो।

NK
12/01/19

Watch the video recitation of the poem on this YouTube link.

मुंतज़िर… Muntazir…

मुन्तज़िर…ता हद्द ए नज़र क्या ढूँढ़ रही ये आँखे मुन्तज़िर,
खंडहर सा अफ़सुरदा दिल राह देखे मुन्तज़िरखिजाँ भी महसूस कर रही मायूसियों को,
बिखरे पड़े पत्तों से एहसास रुखे मुन्तज़िरजब कभी लौटकर सर ए आईने निहारोगे,
इक गुमराह अक़्स पसे आईने राह देखे मुंतज़िरसतहे आब के सफाहों पर मौजों की तहरीरें,
तक़दीर ए बुलबुला लिखकर क़ातिब बैठे मुंतज़िरहर कूचे हर गली में ये नज़ारा दिखे यकसाँ,
मुफलिसी से बरहम बच्चें यहाँ भूखे मुन्तज़िरख़ुश्क अब्र बारिशों के तलबगार है जहाँ,
मैकदों के खाली जाम लबों से सूखे मुंतज़िरवीरान शमशानों की आग बुझ गयी चारसू,
धुआँ उड़ चला बेजान सा राह देखे मुन्तज़िरग़ालिब तिरे ब्राम्हन ने कहा था साल अच्छा है,
तरस रहे इश्तियाक़ में रुखसार सूखे मुन्तज़िरNK
३०/१२/१८अफ़सुरदा saddened
इश्तियाक़ expectation
यकसाँ same
सतह ए आब surface of water
तहरीर writing
बरहम scattered
मुफ़लिसी poverty
ख़ुश्क dry
बुलबुला bubble
क़ातिब writer
सर ए आईने front of mirror पस ए आईने behind mirrorSee the video of the gazal on the YouTube link herehttps://youtu.be/aDxFh8tjsBQ

मोरया…Moraya…

मोरया…🙏🙏🙏

हरसू तू यहाँ, तू ही तू हर जहाँ, मोरया
तू मिरी नस में है, ना मेरी बस में है, मोरया…

तू नज़र में मेरी, पर नज़र में तेरी, है जहाँ,
नेमतों की तेरी, सब पे बरसातें हो, मोरया…

तू ही काबिल है जो, दूर करने इन्हें, रहनुमा,
आज है इस जहाँ, जो ये मज़बूरीयाँ, मोरया…

बदनसीबी ही है, जो न समझे तेरे, मनसूबे,
तेरी ताकत को भी, जो करे अनसुना, मोरया…

रोशनी तू मेरी, बंदगी मैं तेरी, ईश्वरा,
हो ये रहमत तेरी, राह अब तू दिखा, मोरया…

गूंजती अब मिरे, इन लबों से तेरी, जो दुआ,
ऐ खुदा मेरे सुन, मेरी सुन वो सदा, मोरया…

ये फ़िज़ा, ये हवा, ये दिशा, ये समा, सब तेरा,
है तेरी ये जमीं, है तेरा आसमां, मोरया…

इन सितारों के ये कारवाँ, चाँद सूरज तेरे,
है समाया जहाँ, तुझ में ये, या खुदा, मोरया…

तेरे दर पर ख़ुदा, अब तो तामीर करूँ आशियाँ,
दे मुझे तेरे दर पर, पनाह रहनुमा, मोरया..

NK ‘हया’
बेंगलुरु
२७/०७/२०२०

बहर ए गज़ल
212 212 212 212 212
मुतादारिक मुसम्मन सलीम (non standard)

I have attempted to sing this gazal, you can watch it on this YouTube link…

कृष्ण… Krishna…

तुझ्या रंगात जीव हा रंगला,
भावनांच्या जाळ्यात रे गुंतला।

रंग तुझा मनोहारी सावळा,
सावल्या चोरून तेजाने उजळला।

गगनी विराट विश्वरूप दिसता,
समेटून हृदयी भाव हा साठला।

द्वैत अद्वैत द्वंद्वात गुंतल्या
मनाला,
साकार होउनी निराकारी मनी वसला।

मी तुझ्यातला कि तू माझ्यातला,
निरुत्तरीत प्रश्नालाच प्रश्न पडला।

NK
जय श्री कृष्ण🙏🏻🌻, कृष्ण जन्माष्टमी च्या शुभेच्छा…

Posting a small write up on Krishna by my dearest friend Dr Hitesh…

🙏🏻🌻🙏🏻🌻🙏🏻🌻🙏🏻🌻

Good morning doston….,

जय श्री कृष्ण,

आज जन्माष्टमी,
कान्हा का जन्म दिन,

कान्हा की कहानी हम बचपन से सुनते आये है,

मैं कुछ और दार्शनिक बात आपके सामने रखता हूँ।

इंसान में जो मौलिक गुण होना चाहिये(attributes or कला)
वो 64 प्रकार के है(शाश्त्रों के अनुसार)।
हर इंसान में ये पूरे के पूरे मिलना कठिन है।
जिस इंसान में ये पूरे हो उसे पुरुषोत्तम कहा जाता है।
इन गुणों को ईश्वर का नूर माना जाता है, या यूँ कह लो, दैविक संपदा या ईश्वरीय गुण।
जिस में ये जितने ज्यादा उसे GODLY label
किया जाता है।
और इस GODLY इंसान को मानव समुदाय अपना आदर्श मानकर उनके चित्र या मूर्ति को मान सन्मान दे कर पूजना शुरू करती है।

जिसका उद्देश्य सिर्फ यह है की, अगर एक इंसान इतना पूर्ण है तो हम सब भी कोशिश करे उस जैसा होने की।
कोई ऐसा उद्देश्य नही की उस ईश्वरीय इंसान की आप पर कोई विशेष कृपा हो जाये या कोई जादू हो जाय।

चित्र या मूर्ति या नाम जप का सिर्फ यही उद्देश था की, हमें याद रहे की हमें भी इस इंसान की तरह इंसानी और दैविक मूल्यों को हासिल करना है, बढाना है, ताकी समाज कल्याण हो पाए और सामाजिक व्यवस्था सही बनी रहे।

और एक पात्र जो इन कलाओ से सभर माना जाता है वो
श्री राम है।
इन दोनों पात्रो की जिंदगी देखो तो कई कठिनाइयों से भरी पड़ी है।

कान्हा की जिंदगी में तो बचपन से कठिनाइयों की शुरुवात हो गई।

पर ये पात्रों द्वारा हमें सिख मिली है की, जिंदगी की हर कठिनाइयों में अपना मानसिक संतुलन बनाये रख कर, उनका हल निकालते हुए, आगे बढ़ो,नेकी की राह पर चलो।

The Lesson is , keep your self stable in all situations of life and keep yourself on path of goodness.

मेरी सिर्फ यह कोशिश है कि, मैं आपको नया नजरिया दूँ, इन पात्रों के चित्र या मूर्ति को देखने का।
जिस से आपकी चाहत बढ़े अपने आपको इंसानी मूल्यों जो दैविक माने जाते है उनसे सवारने की।

मैं इसमें कोई वादविवाद या ऊँच नीच दिखाने की मंशा नही रखता।

सब अपने भावो को संभाल कर किसी और के नजरिये को जाने समझे यही भाव से ये write-up आप सभीको और मेरे आदर्श कान्हा को समर्पित करता हूँ।

कृष्णा का शाब्दिक अर्थ है,
सबको अपनी तरफ आकर्षित कर आनंद प्रदान करने वाला।
(Meaning given in ISKCON BOOK on KRISHNA.)

आप सभी को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं।

Krishna’s eternal servant,

Hitesh.

🙏🏻🌻🙏🏻🌻🙏🏻🌻🙏🏻🌻

हट के जीने का नाम है जिंदगी…

This is the write up of my dearest friend Dr Hitesh…It’s a very interesting and scientifically proven concept… Very easy to follow and enlightening.

Hence sharing with you all.

Previously also I have shared his write ups on various topics.

🙏🏻🌻🙏🏻🌻🙏🏻🌻🙏🏻🌻

Good morning doston…

All of you know the meaning of disuse atrophy.

वापरोगे नही तो चीज़ें खराब होती है…सामान्य ज्ञान…!!!

Now one step ahead of this concept is,
When you live your life in a same pattern daily ie.
All activities you perform are your reflex activities.
Then same neurons,same interneuronal synapses,same trigger zones,same multiarea coordination happens. Your brain has performed all these for so many times and for so many years.

Nothing new happening for the poor brain.

वही घीसा पिटा रट्टा जिंदगी का…!!!

There is no use of the brain/neurons for altogether new activities, so that it can use it’s full potential for new trigger zones,new interneuronal synapses,new multi area coordination, something new to enjoy.
According to neurologists this can be one of the reasons for development of Dementia and Alzheimer’s disorder.

Disuse atrophy of neuronal potential.

जिंदगी कितनी boring है, ये बात दिमाग में महसूस होती है और दिल पे असर बताती है।

कुछ नया करो रोज

करो वोही काम,पर पैटर्न change करो।

जिंदगी अगर एक गाना है तो,शब्द वही रहने दो कोई अलग राग में गाओ या फिर एक राग रहने दो अलग शब्द fit करो…!!!

जिंदगी एक नाच है तो,नाच वही आंगन अलग,ताल अलग,rhythm अलग, स्टेप्स थोड़ी अलग।

जिंदगी एक write up है तो,लिखते वक्त subject अलग,लिखने का पैटर्न अलग, pen अलग।

जिंदगी एक चित्र है तो,चित्र अलग,कलर अलग,ब्रश अलग,कैनवास अलग,तरीका अलग,थीम अलग।

बस जिंदगी रोज थोड़ा हट के जिओ,
थोड़ी सी रूमानी बना लो,
जिंदगी का मजा बढ़ेगा।

Simple funda but with scientific evidence,

Change your pattern of life and life changes.

Yours always,

Hitesh.

🙏🏻🌻🙏🏻🌻🙏🏻🌻🙏🏻🌻

धुंद पहाट…A Misty Morning…

धुंद पहाट…

दाट धुके पांघरुनी आली ती मंद पहाट,
आठवणींचे पांघरूण ओढूनी पाहते तुझीच वाट।

अवचित पडे सर पावसाची उगीच करूनी ओल,
स्मृतिगंधातील प्रत्येक क्षणांचे मोती जसे अनमोल।

दूर कुठेशी गंध विरघळतो फुलांचा आसमंतात,
तुझ्या मदमस्त सुगंधाने दरवळते मन स्वप्नात।

झोंबतो गार वारा उठवून शहारे अंगावरी,
आठवणीतले काटे बोचतात पुस्तकातील गुलाबा परी।

आभाळी सदरा सहज झटकून मग आसमंताने,
पांघरून घेतला सोनेरी झब्बा अनावधानाने।

किरणे स्पर्शती मजला ती उबदार अलवार,
जाणीव अशीच होते तुझी निर्गुण निराकार।

तृणांकुरा वरील दवबिंदूत प्रतिबिंबित रूप पडे,
नुकत्याच ओल्या केसांना झटकून सांडलेले शिंतोडे।

किलबिलणारे पक्षी झाडावर, मंदिरी किणकिण घंटेची,
तरंगत येती स्वर माधुर्याचे, देती प्रचिती प्रीतीची।

जशी येते रोज ती मंद पहाट, माझिया धुंद मनात,
ये न तू एकदा तरी, स्वप्नात नव्हे… तर सत्यात !!!

NK
१६/१२/१८

रक्षाबंधन…राखी पूर्णिमा… Raksha bandhan… Rakhi Poornima…

एकच धागा…

बंधनाचा
विश्वासाचा रक्षणाचा
आलिंगनाचा
जिव्हाळ्याचा
प्रेमाचा
मायेचा
सौंदर्याचा
निश्चिततेचा
आठवणींचा
सौख्याचा
जवळीकतेचा
मैत्रीचा
दूरचा
ताटातुटीचा
गठबंधनाचा
अनिश्चिततेचा
निर्धाराचा
नजाकतेचा
भावनांचा
स्पष्टतेचा
आश्वासनाचा
अश्रूंचा
आनंदाचा
दुःखाचा
उत्स्फूर्ततेचा
शौर्याचा
आश्रयाचा
युगानुयुगांचा
अनंताचा
मनोकामनेचा
जादूचा
मनाचा
देवाचा
दैवाचा
चमत्काराचा
द्वैत अद्वैताचा
ऋणानुबंधांचा

एकच धागा…कोणी कुणाला, कधी, कुठे, कशासाठी बांधला…???

NK
3/8/20