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emotions in poetry…

Hi…

Welcome to my blog which is all about emotions in poetry…my emotions in my poetry…And your emotions too, as I realised from some of the readers comments…🤗

I have attempted to put my emotions in Hindi…Urdu…Marathi… English…

There are different kinds of poetry from short and sweet charolis to poems…kavitas and gazals…Nazm…

Enjoy them all…

I would also like to thank all my readers for the encouraging comments and likes🙏🙏🙏

Dr Namrata Kulkarni

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चलते चले… Chalte Chale…

चलते चले…

चली हवा तो साथ बहते चले,
बरसी काली घटा तो भीगते चले,

साज छेड़ा कोयल ने मध्यम,
साथ उसके हम गुनगुनाते चले

बहके आंचल से उड़ते चले,
पाज़ेब की खनक से मचलते चले

महकी खुशबू फिज़ाओं में,
बन फूल तितलियों से लिपटते चले

मछली की तरह मचलते यूँ,
एक दरीया बन बह निकलते चले

परिंदे हसरत ए परवाज़ लिये,
आसमानों की लाली में सिमटते चले

चाँद आया सेहरा ए शब बांधे,
सितारे बादलों में छुपकर शरमाते चले

आफ़ताब को अलविदा किये,
फ़रिश्ते रातों की चादर ओढ़ते चले

आये थे खाली हाथ इस आलम,
दोस्तों की दुआयें लिये चलते चले

डॉ नम्रता कुलकर्णी
बेंगलूरु
२०/०३/१८

भक्त…Bhakt…

आषाढी एकादशी च्या शुभेच्छा…जय हरी विठ्ठल🙏🙏🙏

उच्चकोटी की आध्यात्मिक दार्शनिकता को भक्ति योग के नाम से जाना जाता है।

यही भक्ति योग है भगवत गीता का सार,

“अर्जुन मुझे न कोई दान कर के,न तप करके,न पूण्य कर के, ना ही कोई कर्मकांड कर के देखा जा सकता है।
मुझे तो सिर्फ और सिर्फ भक्ति योग से ही (जिसे अव्यभिचारिणी भक्ति,अनन्य भक्ति का नाम दिया गया है) पाये हुए दीव्य चक्षु से देखा जा सकता है।”

इसी अव्यभिचारिणी भक्ति से मीराबाई,नामदेव, तुकाराम,एकनाथ इत्यादि संतो ने आराध्य देव विठ्ठल को पाया था।
भक्ति योग का सरल अर्थ है, ईश्वर को अपना साथी मानकर पूर्ण भक्तिभाव से, सांख्य भाव से जीवन यापन करना।

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌻🌻🌻

इस अभंग रूपी काव्य में भी इसी भक्ति योग की सुंदर झलक है,
जिसने ये कविता का भाव समझा मानो उसने पूर्ण रूप से अध्यात्म को सही मायने में समझ लिया।
अच्छी रचना के लिये अभिनंदन और शुक्रिया।

इस भौतिक दुनिया मै रहते हुए,
अपने किरदारों को सलीके से निभाते हुए,अपनी जिम्मेदारियों को संभालते हुए, जिसने सच्चा ईश्वर भक्त बनने का लक्ष्य रखा है,उसने सही मायने अपने इस धरातल पर आने का लक्ष्य और सौजन्य समज लिया है।

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌻🌻🌻

डॉ हितेश आडतीया

अमरावती

🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌻🌻🌻धन्यवाद हितेश… छान सरळ सोप्या शब्दात सांगितलेला भक्ति योग।

ख़ामोशीयाँ… Khamoshiyan…

खामोशियाँ…

love needs no words…

खामोश बेजुबानियों में गो मुलाक़ातें हुई,
आँखों ही आँखों में इशारों की करामातें हुई

वो कह न पाये कुछ और खामोशी से हम भी निहाँ,
गो रु ब रु रूहों की बातों में मुनाजातें हुई

अनचाहे थे अरमान, बेशुमार मख़फ़ी ख्वाइशें,
जज़्बों की आंधी में तरन्नुम, कैफ़ बरसातें हुई

शरमाई फिर यूँ चाँदनी, लाली शफ़क़ पे छा गयी,
रश्क़े क़मर से नीम शब कैसी रकीबातें हुई

दी जब फरिश्तों ने किनायातें, कुबूलातें हुई,
जैसे कोई रिश्ते को फ़ज़ले रब की सौगातें हुई

डॉ नम्रता कुलकर्णी
बेंगलूरु
०५/०३/१९

बहर रजज़ मसम्मन सालिम

2212 2212 2212 2212

फ़ज़ल ए रब blessings of god
मुनाजात prayer
सौगात gift
किनायात subtle hints
रकीबात rivalry
कैफ़ happiness
मख़फ़ी hidden

Watch the video of this gazal on this link

तलाश है… Talash Hai…

तलाश है…रूह को पुर जोश साँसों की तलाश है,
जिस्म को पैकर लिबासों की तलाश हैवक़्त की रफ़्तार कोई यूँ रोक न पाये,
वक़्त को आहिस्ता कदमों की तलाश हैदर ब दर है ये अब भटके खोये खोये से,
पर इसां को चंद खुशियों की तलाश हैजिन चिरागों को न है कोई आंधीओं का खौफ़,
रात को ऐसी शमाओं की तलाश हैजब भवंडर उठते है याँ समन्दर में,
चंद मौजों को किनारों की तलाश हैमंडराती वाँ सबा मस्तानी गुलज़ार में,
बादबानों को हवाओं की तलाश हैतितलियों की बगलगिरी फूलों से क्यूँ,
जाँ गुलों को ख़ुशबूओं की तलाश हैजाँ दरख्तों से हुए है पंछी गुमशुदा,
सहरा को काली घटाओं की तलाश हैभीड़ शहरों में इंसानों की यूँ भढती गयी,
क़ब्र को दो गज़ जमीनों की तलाश हैकाफ़ी दौलत, शोहरत हासिल किये साहिब,
इक कफ़न चढ़ाने दोस्तों की तलाश हैगुजरी सारी ज़ीस्त, तलाशे मुसलसल में,
ऐ खुदा तेरी दुवाओं की तलाश हैडॉ नम्रता कुलकर्णी
बेंगलूरु
८/३/१८दरख़्त tree
तलाश ए मुसलसल continuous search
पैकर form, body, figure
बगलगिरी close together
मौजें waves2122 2122 2122 2
रमल मुसम्मन महजूफ
(Non standard)

दुनिया…Duniya…

दुनिया…

ऐ ख़ुदा, तूने बनायी ये दुनिया ख़ुदगुमानी,
इब्तिदा ना, इन्तिहा ना, देखी पैहम बदगुमानी

जिंदगी कैसी अजब सी है, गजब इस की कहानी,
है हयाते फ़ानी गो दीखे उम्मीदे जावेदानी

दिखी इंसां को यहाँ हर सू समन्दर ए ताबानी,
ना दिखी याँ किसी को भीतर की ख़लिशे निहानी

देख साहिब ये जवानी चंद पल की मेहमानी,
नासमझ जब समझेंगे तब होगी कितनी मेहरबानी

दौलतो शोहरत बनी है याँ इंसां की नातवानी,
मिले लिबास ए कफ़न दो गज की, बस है ये मुआ’नी

तू निकल बाहर बुतों से, छोड़ उनकी पासबानी,
बादबानों बिन ये कश्ती, रो रही मीरा दीवानी

डॉ नम्रता कुलकर्णी
बेंगलुरु
१६/०२/१८

बहर

2122 2122 2122 2122

रमल मुसम्मन महजूफ

ख़ुद गुमानी self conceited
उम्मीद ए जावेदानी hope of eternity
फ़ानी mortality
समन्दर ए ताबानी ocean of light(excess)
ख़लिश ए निहानी hidden pain
नातवानी weakness
मु’आनी reality
पासबानी guarding

See the video of the gazal on this YouTube link